Class 9 Hindi Chapter 9 Question Answer कृष्ण-महिमा
पाठ-9
कृष्ण-महिमा
(कृष्णनि- महिमा/सोरजि)
यह कविता ‘कृष्ण-महिमा’, महान भक्त कवि रसखान द्वारा रचित है, जो हिंदी साहित्य के ‘भक्ति काल’ की एक अमूल्य निधि है। इस कविता का मुख्य भाव भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण आत्मसमर्पण है। रसखान ने इन छंदों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि एक सच्चा भक्त सांसारिक सुखों और मोक्ष की तुलना में अपने आराध्य का सान्निध्य (नजदीकी) पाना अधिक महत्वपूर्ण समझता है। कविता की भाषा साहित्यिक ब्रज है, जो अपनी मधुरता और सरलता के लिए प्रसिद्ध है।
इस कविता में कवि की इच्छा है कि वे हर जन्म और हर परिस्थिति में ब्रजभूमि का ही हिस्सा बने रहें। वे कृष्ण की लाठी और कंबल के बदले तीनों लोकों का राज-पाट छोड़ने को तैयार हैं, जो उनकी निस्वार्थ भक्ति को दर्शाता है। इसके साथ ही, रसखान ने श्रीकृष्ण के बाल-रूप का अत्यंत सजीव चित्रण किया है, जहाँ वे धूल से सने बालक कृष्ण की एक झलक पर कामदेव के सौंदर्य को भी न्योछावर कर देते हैं। अंत में, गोपी-भाव के माध्यम से कवि ने यह दिखाया है कि भक्त अपने प्रिय का रूप तो धारण कर सकता है, परंतु उनकी पवित्र मुरली के प्रति गहरा सम्मान और श्रद्धा का भाव भी रखता है। कुल मिलाकर, यह कविता धार्मिक सीमाओं को तोड़कर ईश्वर के प्रति पवित्र और निश्चल प्रेम का संदेश देती है।
अभ्यास-माला (सोलोंनायनि फारि)
बोध एवं विचार
1. सही विकल्प का चयन करो :
(थार फिननायखौ सायख’)
(क) रसखान कैसे कवि थे?
( रसखानआ माबादि खन्थाइगिरिमोन?)
(1) कृष्णभक्त (2) रामभक्त
(3) सूफी (4) संत
उत्तर: (1) कृष्णभक्त
(ख) कवि रसखान की प्रामाणिक रचनाओं की संख्या है –
(खन्थाइगिरि रसखाननि गाहायै रनसायजानाय बिजाबफोरनि अनजिमाया जाबाय –)
(1) तीन (2) दो
(3) चार (4) पाँच
उत्तर: (3) चार
(ग) पत्थर बनकर कवि रसखान कहाँ रहना चाहते हैं?
(खन्थाइगिरि रास खानआ अन्थाय जानानै बबेयाव थानो लुबैयो?)
(1) हिमालय पर्वत पर
(2) गोवर्धन पर्वत पर
(3) विंध्य पर्वत पर
(4) नीलगिरि पर
उत्तर: (2) गोवर्धन पर्वत पर
(घ) बालक कृष्ण के हाथ से कौआ क्या लेकर भागा ?
उन्दै कृष्णनि आखाइनिफ्राय दावखाया माखौ लानानै खारदों?
(1) सूखी रोटी (2) दाल-रोटी
(3) पावरोटी (4) माखन-रोटी
उत्तर: (4) माखन-रोटी
2. एक शब्द में उत्तर दो :
(मोनसे सोदोबजों फिन हो)
(क) रसखान ने किनसे भक्ति की दीक्षा ग्रहण की थी?
(रसखानआ सोरनिफ्राय सिबिनायनि दीक्षा लादोंमोन?)
उत्तर: गोस्वामी विट्ठलनाथ जी से।
(ख) ‘प्रेमवाटिका’ के रचयिता कौन हैं?
(‘प्रेमवाटिका’ नि लिरगिरिया सोर?)
उत्तर: रसखान।
(ग) रसखान की काव्य-भाषा क्या है?
(रसखाननि खन्थाइनि-रावआ मा?)
उत्तर: ब्रजभाषा ।
(घ) आराध्य कृष्ण का वेष धारण करते हुए कवि अधरों पर क्या धारण करना नहीं चहते?
उत्तर: मुरली ।
(ङ) किनकी गाय चराकर कवि रसखान सब प्रकार के सुख भुलाना चाहते हैं?
(खन्थाइगिरि रास खानआ गासैबो रोखोमनि गोजोननायखौ बावगारनो सोरनि मोसौखौ गुमनो नागिरदोंमोन?)
उत्तर: नंद की गाय।
3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(आबुं बाथ्राजों फिन हो)
(क) कवि रसखान कैसे इंसान थे?
(खन्थाइगिरि रसखानआ माबादि सुबुंमोन?)
उत्तर: कवि रसखान कोमल हृदयवाले, भावुक प्रकृति के इंसान थे।
(ख) कवि रसखान किस स्थिति में गोपियों के कृष्ण-प्रेम से अभिभूत हुए थे?
(खन्थाइगिरि रसखान आ बबे थासारियाव गोपीफोरनि कृष्णनि अननायों गोरोबलांदोंमोन?)
उत्तर: कवि रसखान श्रीमद्भागवत का फारसी अनुवाद पढ़कर गोपियों के कृष्ण-प्रेम से अभिभूत हुए थे।
(ग) कवि रसखान ने अपनी रचनाओं में किन छंदों का अधिक प्रयोग किया है?
(खन्थाइगिरि रसखानआ गावनि रनसायनायफोराव बबे खोन्दोखौ बांसिन बाहायदों?)
उत्तर: कवि रसखान ने अपनी रचनाओं में दोहा, कवित्त और सवैया छंदों का अधिक प्रयोग किया है।
(घ) मनुष्य के रूप में कवि रसखान कहाँ बसना चाहते हैं?
(सुबुं महरै खन्थाइगिरि रासाखानआ बहा थानो लुबैयो?)
उत्तर: मनुष्य के रूप में कवि रसखान ब्रज-गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच बसना चाहते हैं।
(ङ) किन वस्तुओं पर कवि रसखान तीनों लोकों का राज न्योछावर करने को प्रस्तुत हैं ?
(खन्थाइगिरि रसखानआ बबे आयदानि सायाव मोनथाम संसारनि खुंथाइखौ बावगारनो गोसो जादों?)
उत्तर: कवि रसखान श्रीकृष्ण की लाठी (लकुटी) और कंबल (कामरिया) पर तीनों लोकों का राज न्योछावर करने को प्रस्तुत हैं।
4. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में):
(जोबोद गुसुङै फिन्नाय हो (25 सो सोदोबाव)।)
(क) कवि का नाम ‘रसखान’ किस प्रकार पूर्णतः सार्थक बन पड़ा है?
(खन्थाइगिरि नि मुं ‘रसखान’ माबोरै मोननो हाखो?)
उत्तर: कवि की रचनाओं में भक्ति-रस, प्रेम-रस और काव्य-रस तीनों का अद्भुत मिश्रण मिलता है। उनकी कविताएँ आनंद की खान हैं, इसलिए उनका नाम ‘रसखान’ पूर्णतः सार्थक है।
(ख) ‘जो खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी-कुल-कदंब की डारन’ – का आशय क्या है?
(‘दाव जानानै जोनोम जायोब्ला, यमुना दैमानि सेराव खोदोम बिफांनि दालायाव बासा लाना थानो मोन्थों’-बेनि ओंथिया मा?)
उत्तर: इसका आशय यह है कि यदि कवि अगले जन्म में पक्षी बनें, तो वे यमुना के किनारे स्थित कदम्ब के पेड़ों की डालियों पर अपना बसेरा बनाना चाहते हैं, ताकि वे सदैव कृष्ण की लीला-भूमि के समीप रहें।
(ग) ‘वा छबि कों रसखानि बिलोकत, वारत काम कलानिधि कोटी’- का तात्पर्य बताओ।
उत्तर: इसका तात्पर्य है कि बालक कृष्ण की धूल से भरी सुंदर छवि को देखकर कामदेव भी अपनी करोड़ों कलाओं और सौंदर्य को उन पर न्योछावर कर देते हैं। कृष्ण का बाल-रूप अद्वितीय है।
(घ) “भावतो वोहि मेरे ‘रसखानि’, सो तेरे कहे सब स्वांग भरौंगी”- का भाव स्पष्ट करो।
उत्तर: यहाँ एक गोपी अपनी सखी से कहती है कि मुझे मेरा कृष्ण बहुत प्रिय है, इसलिए उसकी प्रसन्नता के लिए मैं उसके जैसा वेश धारण करने के सारे स्वांग करने को तैयार हूँ।
5. संक्षेप में उत्तर दो ( लगभग 50 शब्दों में) :
गुसुङै फिन हो (50 सो सोदोबाव)
(क) कवि रसखान अपने आराध्य का सान्निध्य किन रूपों में प्राप्त करना चाहते हैं ?
( खन्थाइगिरि रासखानआ माबे महराव गावनि सिबिनायखौ मोननो लुबैयो?)
उत्तर: कवि रसखान हर जन्म और हर रूप में श्रीकृष्ण का सान्निध्य पाना चाहते हैं। वे मनुष्य के रूप में गोकुल के ग्वाल, पशु के रूप में नंद की गाय, पत्थर के रूप में गोवर्धन पर्वत का हिस्सा और पक्षी के रूप में यमुना किनारे कदम्ब की डाल पर निवास करना चाहते हैं। इस प्रकार वे ब्रज की प्रकृति का अंग बनकर अपने आराध्य के समीप रहना चाहते हैं।
(ख) अपने उपास्य से जुड़े किन उपकरणों पर क्या-क्या न्योछावर करने की बात कवि ने की है?
उत्तर: कवि रसखान अपने आराध्य श्रीकृष्ण से जुड़ी वस्तुओं को सांसारिक सुखों से ऊपर मानते हैं। वे कृष्ण की लाठी और कंबल (लकुटी और कामरिया) के लिए तीनों लोकों का राज-पाट छोड़ने को तैयार हैं। साथ ही, वे नंद की गायों को चराने के सुख के बदले आठों सिद्धियों और नौ निधियों के सुख को भी न्योछावर करने की बात करते हैं।
(ग) कवि ने श्रीकृष्ण के बाल-रूप की माधुरी का वर्णन किस रूप में किया है ?
उत्तर: कवि ने कृष्ण के बाल-रूप का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया है। वे कहते हैं कि बालक कृष्ण धूल से लथपथ होने के बाद भी अत्यंत सुंदर लग रहे हैं, उनके सिर पर सुंदर चोटी है और पैरों में बजती पैंजनिया उनके आकर्षण को बढ़ा रही है। इस छवि पर कामदेव अपनी करोड़ों कलाएँ न्योछावर करते हैं और एक भाग्यशाली कौआ उनके हाथ से माखन-रोटी छीनकर ले जाता है।
(घ) कवि ने अपने आराध्य की तरह वेश धारण करने की इच्छा व्यक्त करते हुए क्या कहा है ?
उत्तर: कवि (गोपी के भाव में) कहते हैं कि वे कृष्ण के प्रेम में उनके जैसा रूप धारण करने को तैयार हैं। वे सिर पर मोरपंख का मुकुट, गले में गुंज की माला और शरीर पर पीले वस्त्र पहनकर वन में गायों के पीछे घूमने का स्वांग करेंगे। परंतु, वे उस मुरली को कभी अपने होठों से नहीं लगाएंगे जिसे कृष्ण धारण करते हैं, क्योंकि वे उसे अपनी सौत जैसा सम्मान या दूरी देते हैं।
6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):
(क) कवि रसखान का साहित्यिक परिचय प्रस्तुत करो।
उत्तर: कवि रसखान हिंदी साहित्य की कृष्णभक्ति-काव्यधारा के एक अनन्य मुस्लिम कवि थे। उनका जन्म लगभग 1533 ई. में दिल्ली के एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था, परंतु उनकी रचनाओं में मौजूद भक्ति और काव्य-रस के कारण वे ‘रसखान’ (रस की खान) के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने गोस्वामी विट्ठलनाथ जी से दीक्षा ली और ब्रजभूमि को अपनी कर्मभूमि बनाया। उनकी प्रमुख प्रामाणिक रचनाओं में ‘सुजान-रसखान’, ‘प्रेमवाटिका’, ‘दानलीला’ और ‘अष्टयाम’ शामिल हैं। रसखान ने मुख्य रूप से ब्रजभाषा में अपनी रचनाएँ की हैं, जो अपनी सरलता, मधुरता और प्रवाह के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में ‘सवैया’, ‘कवित्त’ और ‘दोहा’ छंदों का उत्कृष्ट प्रयोग किया है।
(ख) कवि रसखान की कृष्ण-भक्ति पर प्रकाश डालो।
उत्तर: रसखान की कृष्ण-भक्ति सांप्रदायिक सीमाओं से परे थी। एक मुस्लिम कुल में जन्म लेने के बावजूद, उनकी आस्था भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट थी। उनकी भक्ति ‘तन्मयता’ और ‘आत्मसमर्पण’ का अनुपम उदाहरण है। वे कृष्ण से इतना प्रेम करते थे कि वे उनके सान्निध्य के लिए सांसारिक और पारलौकिक, दोनों प्रकार के सुखों का त्याग करने को तैयार थे। उनकी भक्ति में केवल कृष्ण ही नहीं, बल्कि कृष्ण से जुड़ी हर वस्तु (जैसे- लाठी, कंबल, ब्रज के वन, बाग और तालाब) के प्रति गहरा अनुराग झलकता है। वे हर जन्म में कृष्ण की लीला-भूमि ब्रज में ही निवास करना चाहते थे। उनकी भक्ति में ‘माधुर्य भाव’ की प्रधानता है, जहाँ वे कभी कृष्ण के बाल-रूप पर मोहित होते हैं, तो कभी गोपी बनकर उनके विरह और प्रेम को व्यक्त करते हैं।
(ग) पठित छंदों के जरिए कवि रसखान ने क्या-क्या कहना चाहा है?
उत्तर: पठित छंदों (कृष्ण-महिमा) के माध्यम से रसखान ने अपने आराध्य के प्रति अगाध प्रेम और ब्रजभूमि के प्रति अपना गहरा जुड़ाव व्यक्त किया है। प्रथम छंद में उन्होंने इच्छा जताई है कि चाहे वे मनुष्य बनें, पशु, पत्थर या पक्षी, हर रूप में उन्हें केवल ब्रज और कृष्ण का साथ मिले। दूसरे छंद में वे कृष्ण की वस्तुओं (लाठी और कंबल) के बदले तीनों लोकों के सुख को तुच्छ बताते हैं। तीसरे छंद में उन्होंने बालक कृष्ण के सौंदर्य का मनमोहक वर्णन करते हुए उनके बाल-रूप को सर्वश्रेष्ठ बताया है, जिस पर कामदेव का सौंदर्य भी न्योछावर है। चौथे छंद में कवि ने गोपी-भाव के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि भक्त अपने आराध्य का रूप तो धारण कर सकता है, परंतु उनकी मर्यादा और पवित्रता (मुरली के प्रति सम्मान) का सदैव ध्यान रखता है। कुल मिलाकर, इन छंदों के माध्यम से उन्होंने अनन्य भक्ति का संदेश दिया है।
7. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभ 100 शब्दों में):
फरानि हेफाजाबाव बेखेव (100 सो सोदोबाव):
(क) ‘मनुष्य हौं तो वही ………………….. नित नंद की धेनु मँझारन।’
उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘कृष्ण-महिमा’ पाठ से ली गई हैं, जिसके रचयिता कृष्णभक्त कवि रसखान हैं। इन पंक्तियों में कवि ने पुनर्जन्म होने पर ब्रजभूमि में ही रहने की इच्छा व्यक्त की है।
व्याख्या: रसखान कहते हैं कि यदि अगले जन्म में मुझे मनुष्य का जीवन मिले, तो मैं ब्रज के गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच ही निवास करूँ। यदि मैं पशु बनूँ, तो इसमें मेरा कोई वश नहीं, फिर भी मेरी यही चाहत है कि मैं सदैव बाबा नंद की गायों के बीच चरता रहूँ। कवि का आशय यह है कि वे किसी भी रूप में अपने आराध्य कृष्ण की जन्मभूमि से दूर नहीं होना चाहते।
(ख) ‘रसखान कबौं इन आँखिन …………… करील के कुंजन ऊपर वारौं।।’
उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘कृष्ण-महिमा’ पाठ से ली गई हैं। इसमें कवि ने ब्रज के प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति अपने अनन्य प्रेम को प्रकट किया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि मेरी आँखें कब से ब्रज के वन, बागों और तालाबों को निहारने के लिए लालायित हैं। वे कहते हैं कि ब्रज की इन काँटेदार करील की झाड़ियों और कुंजों के सुख के सामने मैं सोने के करोड़ों महलों (कलधौत के धाम) को भी न्योछावर करने को तैयार हूँ। कवि के लिए सांसारिक वैभव से कहीं अधिक मूल्यवान कृष्ण की लीला-स्थली का प्राकृतिक परिवेश है।
(ग) ‘धूरि भरे अति सोभित ……………….. पैंजनीं बाजतीं पीरीं कछोटी।’
उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘कृष्ण-महिमा’ पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में रसखान ने बालक श्रीकृष्ण के अत्यंत मनमोहक और सलोने रूप का वर्णन किया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि बालक कृष्ण धूल से लथपथ हैं, फिर भी वे अत्यंत शोभित (सुंदर) लग रहे हैं। उनके सिर पर बनी सुंदर चोटी उनके सौंदर्य को और बढ़ा रही है। वे अपने घर के आँगन में खेलते और खाते हुए घूम रहे हैं, उनके पैरों में पायल (पैंजनी) बज रही है और उन्होंने पीले रंग की छोटी धोती (कछोटी) पहनी हुई है। यह बाल-सुलभ रूप इतना आकर्षक है कि कोई भी भक्त इस पर मुग्ध हो सकता है।
(घ) ‘मोरा-पखा सिर ऊपर राखिहौं ………… … गोधन ग्वारनि संग फिरौंगी।’
उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘कृष्ण-महिमा’ पाठ से ली गई हैं। यह सवैया गोपी-भाव को दर्शाता है, जहाँ एक गोपी अपनी सखी के कहने पर कृष्ण का वेश धारण करने को तैयार है।
व्याख्या: गोपी अपनी सखी से कहती है कि हे सखी! तेरे कहने पर मैं अपने सिर पर मोरपंख का मुकुट रखूँगी और गले में गुंज की माला पहनूँगी। मैं कृष्ण की तरह पीले वस्त्र ओढ़कर और हाथ में लाठी लेकर वन-वन गायों और ग्वालों के साथ घूमूँगी। भाव यह है कि गोपी अपने प्रिय कृष्ण को रिझाने के लिए उनका हर रूप धारण करने को तैयार है, क्योंकि उसे कृष्ण का हर स्वांग प्रिय है।
भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
(राव आरो रावखान्थिनि गियान)
(क) निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखो :
(गाहायाव होनाय सोदोबफोरनि गुबै महरखौ लिर )
मानुष, पसु, पाहन, आँख, छबि, भाग
उत्तर: मानुष – मनुष्य
पसु – पशु
पाहन – पाषाण
आँख – अक्षु / अक्षि
छबि – छवि
भाग – भाग्य
(ख) निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखो :
(गाहायाव होनाय सोदोबफोरनि थाखाय मोनथाम एखे सोदोब लिर)
कृष्ण, कालिंदी, खग, गिरि, पुरंदर
उत्तर:
कृष्ण – केशव, माधव, गोपाल, मुरारी
कालिंदी – यमुना, तरणि-तनूजा, भानुजा, रवि-नंदिनी
खग – पक्षी, विहग, नभचर, पंछी
गिरि – पर्वत, पहाड़, अचल, शैल
पुरंदर – इंद्र, देवराज, सुरेश, शचीपति
(ग) संधि-विच्छेद करो :
(चन्द’ सोदोबखौ सिफाय)
पीताम्बर, अनेकानेक, इत्यादि, परमेश्वर, नीरस
उत्तर:
पीताम्बर – पीत + अम्बर
अनेकानेक – अनेक + अनेक
इत्यादि – इति + आदि
परमेश्वर – परम + ईश्वर
नीरस – निः + रस
(घ) निम्नलिखित शब्दों के खड़ीबोली (मानक हिंदी) में प्रयुक्त होने वाले रूप बताओ :
( मानगोनां हिन्दी आव बाहायजानाय गाहायाव होनाय सोदोबफोरनि महरफोरखौ फोरमाय)
मेरो, बसेरो, अरु, कामरिया, धूरि, सोभित, माल, सों
उत्तर: मेरो – मेरा
बसेरो – बसेरा (निवास करना / रहना)
अरु – और
कामरिया – छोटा कंबल
धूरि – धूल
सोभित – सुशोभित (सुंदर दिखाई देना)
माल – माला
सों – से
(ङ) निम्नलिखित शब्दों के साथ भाववाचक प्रत्यय ‘ता’ जुड़ा हुआ है-
सहजता, मधुरता, सरसता, तल्लीनता, मार्मिकता
– ऐसे ही ‘ता’ प्रत्यय वाले पाँच भाववाचक संज्ञा-शब्द लिखो।
उत्तर: सुंदरता, मानवता, वीरता, लघुता और प्रभुता।
Note: If you find any mistakes in these questions and answers, you can tell us or correct it yourself.
जुदि नोंथाङा बेफोर सोंथिफोर आरो फिननायाव माबा गोरोन्थि मोनो, अब्ला नोंथाङा जोंनो खोन्थानो हागोन एबा गावनो बेखौ सुद्रायनो हागोन।
Class 9 Other Subjects: थाखो 9 नि गुबुन आयदाफोर
Hindi :
FAQs:
1. Where can I get Class 9 Hindi Chapter 9 Question Answer कृष्ण-महिमा?
You can get complete Class 9 Hindi Chapter 9 Question Answer कृष्ण-महिमा on Bodoland Library .
2. Is this lesson included in the ASSEB/SEBA Class 9 Hindi syllabus?
Yes, the Class 9 Hindi syllabus and is prescribed by the ASSEB/SEBA.
3. Is the “Class 9 Hindi Chapter 10 Question Answer कृष्ण-महिमा“ lesson important for exam preparation?
Yes, questions from this lesson are commonly asked in ASSEB/SEBA Class 9 Hindi exams, including short answers, long answers, and vocabulary-based questions.