Class 9 Hindi Chapter 1 Question Answer हिम्मत और जिंदगी
पाठ-1
हिम्मत और जिंदगी
(साहस आरो जिउ)
यह अध्याय राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक निबंध है, जिसका शीर्षक ‘हिम्मत और जिंदगी’ है। इस अध्याय की शुरुआत लेखक के संक्षिप्त जीवन परिचय से होती है, जिसमें उनके संघर्षपूर्ण बचपन, उनकी शिक्षा और उनके साहित्यिक योगदानों पर प्रकाश डाला गया है। ‘दिनकर’ जी को उनकी प्रसिद्ध कृति ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए साहित्य अकादमी और ‘उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस निबंध के माध्यम से लेखक ने जीवन को जीने के सही नजरिए और साहस के महत्व को रेखांकित किया है।
निबंध का मुख्य संदेश यह है कि जिंदगी का असली आनंद उन्हीं को मिलता है जो कठिनाइयों का सामना करते हैं। दिनकर जी तर्क देते हैं कि जो लोग हमेशा सुख-सुविधाओं और ‘फूलों की छाँह’ में रहते हैं, वे जीवन के वास्तविक स्वाद से वंचित रह जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, पानी का असली आनंद वही जान सकता है जो रेगिस्तान की धूप में प्यास से तड़प रहा हो। लेखक के अनुसार, जो व्यक्ति जोखिम लेने से डरते हैं और केवल सुरक्षा के घेरे में दुबक कर बैठते हैं, वे कभी भी समुद्र से मोती प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने अकबर और पांडवों के ऐतिहासिक उदाहरणों के जरिए यह समझाया है कि बड़ी हस्तियाँ हमेशा बड़ी मुसीबतों और संकटों के बीच ही निखरती हैं।
लेखक ने साहस और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया है। वे कहते हैं कि साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता कि दुनिया उसके बारे में क्या सोच रही है। वह भेड़-बकरियों की तरह झुंड में चलने के बजाय सिंह की तरह अकेला चलना पसंद करता है। अंत में, यह अध्याय हमें सिखाता है कि उपवास और संयम से ही भोग का सच्चा सुख मिलता है। दिनकर जी पाठकों का आह्वान करते हैं कि वे अपनी इच्छाओं का दायरा छोटा न करें और जिंदगी के फल को दोनों हाथों से निचोड़कर उसका रस पिएं। उनके अनुसार, जीवन उन्हीं का है जो निडर होकर संघर्ष करते हैं और हार-जीत की परवाह किए बिना अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहते हैं।
अभ्यास-माला (सोलोंनायनि फारि)
(अ) सही विकल्प का चयन करो (थार फिननायखौ सायख’) :
1. किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है?
( माबायदि मानसिया बांसिन गोजोननायखौ मोननो हायो?)
(क) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है।
(जाय सुखुनि बेसेनखौ सिगां सफुङो।)
(ख) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है और उसका मजा बाद में लेता है।
(जाय सुखुनि बेसेनखौ सिगां सफुङो आरो बेनि गोजोननायखौ उनाव लायो।)
(ग) जिसके पास धन और बल दोनों हैं।
(जायहा धोन आरो गोहो मोननैबो दं।)
(घ) जो पहले दुःख झेलता है।
(जाय गिबियाव दुखु सैनाङो ।)
उत्तर: (ख) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है और उसका मजा बाद में लेता है।
2. पानी में जो अमृत-तत्त्व है, उसे कौन जानता है?
(दैयाव थानाय अमृतखौ सोर मिथिगौ?)
(क) जो प्यासा है।
(ख) जो धूप में खूब सूख चुका है।
(ग) जिसका कंठ सूखा हुआ है।
(घ) जो रेगिस्तान से आया है।
उत्तर: (ख) जो धूप में खूब सूख चुका है।
3. ‘गोधूली वाली दुनिया के लोगों’ से अभिप्राय है-
(‘गोधुलि संसारनि सुबुंफोर’ नि ओंथिया जादों-)
(क) विवशता और अभाव में जीने वाले लोग।
(ख) जय-पराजय के अनुभव से परे लोग।
(ग) फल की कामना न करने वाले लोग।
(घ) जीवन को दाँव पर लगाने वाले लोग।
उत्तर: (ख) जय-पराजय के अनुभव से परे लोग।
4. साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह –
(सासे साहसगोनां सुबुंनि गिबि सिनायथिया जाबाय बियो –)
(क) सदा आगे बढ़ता जाता।
(ख) बाधाओं से नहीं घबराता है।
(ग) लोगों की सोच की परवाह नहीं करता।
(घ) बिलकुल निडर होता है।
उत्तर: (ग) लोगों की सोच की परवाह नहीं करता।
(आ) संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में): (सुंद’ फिननाय हो (25 सोदोबाव))
1.चाँदनी की शीतलता का आनंद कैसा मनुष्य उठा पाता है ?
(अखाफोरनि गुसुनि गोजोननायखौ सोरबादि सुबुङा लानो हायो?)
उत्तर: चाँदनी की शीतलता का आनंद वही मनुष्य उठा पाता है जो दिन भर धूप में थक कर लौटा है, जिसके शरीर को अब तरलाई (शीतलता) की ज़रूरत महसूस होती है और जिसका मन यह जानकर संतुष्ट है कि दिन भर का समय उसने किसी अच्छे काम में लगाया है। ।
2. लेखक ने अकेले चलने वाले की तुलना सिंह से क्यों की है?
(लिरगिरिया हारसिं थाबायग्राखौ सिंहजों मानो रुजुदों?)
उत्तर: लेखक ने अकेले चलने वाले की तुलना सिंह से इसलिए की है क्योंकि शेर झुंड में नहीं, बल्कि अकेला और निडर होकर चलता है। जिस प्रकार सिंह अपनी शक्ति और साहस के बल पर अपनी राह खुद बनाता है, उसी प्रकार साहसी मनुष्य भी जनमत की परवाह किए बिना अपने उच्च उद्देश्यों की ओर अकेला ही बढ़ता है। वह भैंसों और भेड़ों की तरह झुंड में चलना पसंद नहीं करता।
3. जिंदगी का भेद किसे मालूम है?
(जिउनि गुमुरखौ सोर मिथिगौ ?)
उत्तर: जिंदगी का भेद उसी मनुष्य को मालूम है जो यह जानकर चलता है कि जिंदगी कभी भी खत्म न होने वाली चीज है। ऐसा व्यक्ति जिंदगी के संकटों का सामना साहस के साथ करता है और जोखिम झेलने से नहीं डरता। जो व्यक्ति मौत को पास देखकर भी अपनी हँसी और साहस नहीं खोता, वही जीवन के वास्तविक रहस्य को समझ पाता है।
4. लेखक ने जीवन के साधकों को क्या चुनौती दी है?
(लिरगिरिया जिउनि नागिरग्राफोरखौ मा जुजिनांथि होदों?)
उत्तर: लेखक ने जीवन के साधकों को यह चुनौती दी है कि यदि वे केवल किनारे की मरी हुई सीपियों को बटोरकर संतुष्ट हो जाएंगे, तो समुद्र के अंतराल (गहराई) में छिपे हुए मौक्तिक-कोष (मोतियों का खजाना) को बाहर कौन लाएगा ।
(इ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में):
(गाहायाव होनाय सोंलुफोरनि फिनखौ हो (50 सोदोबाव))
1. लेखक ने जिंदगी की कौन-सी दो सूरतें बताई हैं और उनमें से किसे बेहतर माना है?
( लिरगिरिया जिउनि बबे मोननै बिथिंखौ बेखेवदों आरो बबे मोनसेखौ साबसिन सानदों? )
उत्तर: लेखक ने जिंदगी की दो सूरतें बताई हैं:
1. पहली सूरत: वह व्यक्ति जो अपनी जिंदगी को बंद खिड़कियों और पंखों के नीचे छिपाकर बिताता है। वह जोखिम उठाने से डरता है और संघर्षों से बचकर केवल सुरक्षित जीवन जीना चाहता है। लेखक के अनुसार, ऐसा जीवन “दिन-रात सड़ने” जैसा है।
2. दूसरी सूरत: वह व्यक्ति जो बड़े लक्ष्य के लिए कोशिश करता है और अपनी जीत पर पंजा डालने के लिए साहस के साथ संघर्षों का सामना करता है। ऐसा व्यक्ति कष्ट सहकर ही सुख का असली मूल्य समझता है।
लेखक ने दूसरी सूरत को बेहतर माना है।
2. जीवन में सुख प्राप्त न होना और मौके पर हिम्मत न दिखा पाना- इन दोनों में से लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?
(लिरगिरिया बेफोरनि गेजेराव बबे बाथ्राखौ सानो: जिउआव सुखुखौ मोननो हायै आरो खाबु मोनब्ला साहस दिन्थिनो हायै, आरो मानो?)
उत्तर: लेखक ने जीवन में सुख प्राप्त न होने को श्रेष्ठ माना है। उनके अनुसार, जीवन में सुख न मिलना केवल एक भौतिक कमी है, लेकिन मौके पर हिम्मत न दिखा पाना मनुष्य के लिए धिक्कार की बात है। जो व्यक्ति संकट के समय साहस नहीं दिखाता, उसकी आत्मा उसे बार-बार ‘कायर’ कहकर धिक्कारती है। साहस से भागने का यह पछतावा, सुख के अभाव से कहीं अधिक दुखदायी होता है। इसलिए संघर्ष करते हुए सुख न पाना, कायर बनकर जीने से कहीं श्रेष्ठ है।
3. पाठ के अंत में दी गई कविता की पंक्तियों से युधिष्ठिर को क्या सीख दी गई है ?
( फरा जोबनायाव होनाय खन्थाइनि सारिफोरनिफ्राय युधिष्ठिरखौ मा आयदा फोरोंनाय जायो? )
उत्तर: पाठ के अंत में दी गई कविता की पंक्तियों के माध्यम से युधिष्ठिर को यह सीख दी गई है कि उन्हें जीवन का पूर्ण आनंद लेने के लिए किसी का क्रीतदास बनने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें कष्टों से डरने के बजाय उनका निर्भय होकर सामना करना चाहिए और स्वयं पर निर्भर रहकर अपनी राह बनानी चाहिए। कविता का मूल संदेश यही है कि जो मृत्यु से नहीं डरता, जीवन उसी का दास होता है; अतः संघर्षों से लड़कर अपनी शर्तों पर जीना ही सच्चा जीवन है।
(ई) सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में):
(आयदाजों बेखेव (100 सोदोबाव))
(क) साहसी मनुष्य सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है।
(सासे साहसि मानसिया सिमांखौ दाहार लाया, बियो गावनि सानस्रियाव मुखुब जानानै गावनि बिजाबखौ फरायो ।)
उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखे गए पाठ ‘हिम्मत और जिंदगी’ से ली गई है। इसमें लेखक ने बताया है कि एक साहसी व्यक्ति अपनी सोच और मेहनत के दम पर आगे बढ़ता है।
व्याख्या: साहसी मनुष्य हमेशा अपनी बुद्धि और विवेक से काम लेता है। वह दूसरों के लक्ष्यों या विचारों की नकल नहीं करता, जिसे लेखक ने “सपने उधार नहीं लेना” कहा है। वह दूसरों को देखकर अपना रास्ता नहीं बदलता, बल्कि अपने मौलिक विचारों पर भरोसा करता है। जो लोग केवल दूसरों के भरोसे रहते हैं या जोखिम लेने से डरते हैं, उन्हें सफलता नहीं मिलती। साहसी मनुष्य दूसरों के बताए रास्तों पर चलने के बजाय अपने अनुभवों से सीखता है और संघर्ष करके अपने जीवन को सार्थक बनाता है।
(ख) कामना का अंचल छोटा मत करो, जिंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो।
( लुबैनायनि जायगाखौ फिसा दाखालाम; जिउनि फिथाइखौ फारनैबो आखायजों सेबनानै फसर।
उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखे गए पाठ ‘हिम्मत और जिंदगी’ से ली गई है। इसमें लेखक ने मनुष्य को बड़े लक्ष्य रखने और जीवन का भरपूर आनंद लेने की प्रेरणा दी है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मनुष्य को अपनी ‘कामना का अंचल’ यानी अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों को छोटा नहीं रखना चाहिए। हमें जीवन में कुछ बड़ा पाने की चाह रखनी चाहिए। “जिंदगी के फल को निचोड़ने” का अर्थ है कि जीवन में जो भी अवसर या सुख मिले, उसका पूरी शक्ति और साहस के साथ आनंद लेना चाहिए। हमें डर-डर कर या कंजूसी से नहीं जीना चाहिए, बल्कि चुनौतियों का सामना करते हुए जीवन के हर अनुभव को पूरी तरह जीना चाहिए।
अतिरिक्त प्रश्न उत्तर
(उफेरा सोंनाय फिननाय)
1. ‘हिम्मत और जिंदगी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: रामधारी सिंह ‘दिनकर’।
2. लेखक ने साहस की जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान क्या बताई है?
उत्तर: निडरता (बिल्कुल बेखौफ होना)।
3. साहसी मनुष्य किसकी चिंता नहीं करता?
उत्तर: जनमत की (कि लोग क्या सोचेंगे)।
4. लेखक ने किसे सिंह के समान बताया है?
उत्तर: अकेले चलने वाले साहसी मनुष्य को।
5. झुंड में चलना किसका काम है?
उत्तर: भेड़ और भैंस का।
6. साहसी मनुष्य के सपने कैसे होते हैं?
उत्तर: मौलिक (वह सपने उधार नहीं लेता)।
7. लेखक के अनुसार असली दुनिया किनकी है?
उत्तर: हिम्मत वालों की।
8. किसके लिए सुख की सेज काँटों की शय्या है?
उत्तर: जो जोखिम से बचते हैं।
9. छाया का असली आनंद किसे मिलता है?
उत्तर: जो धूप में खूब तपकर आया हो।
10. प्यास लगने पर पानी पीने का आनंद किसे मिलता है?
उत्तर: जिसने पहले प्यास सही हो।
11. उपवास की स्थिति में भोजन का स्वाद कैसा लगता है?
उत्तर: अमृत के समान।
12. जिंदगी का भेद किसे मालूम है?
उत्तर: जो यह जानता है कि जिंदगी खत्म न होने वाली चीज है।
12. अर्नल्ड बेनेट ने किस बात पर जोर दिया है?
उत्तर: साहस के बिना मनुष्य कभी सुखी नहीं हो सकता।
13. कायर मनुष्य हमेशा किससे डरता है?
उत्तर: संकट और चुनौतियों से।
14. साहसी व्यक्ति का मुख्य गुण क्या है?
उत्तर: आत्मविश्वास और निर्भयता।
15. लेखक ने मध्यम वर्ग को कैसा बताया है?
उत्तर: कायर और सुरक्षित घेरों में रहने वाला।
16. मरी हुई सीपियाँ कहाँ मिलती हैं?
उत्तर: किनारे पर।
17. मोतियों का खजाना (मौक्तिक-कोष) कहाँ मिलता है?
उत्तर: समुद्र की गहराई में।
18. जिंदगी के फल को कैसे भोगना चाहिए?
उत्तर: दोनों हाथों से दबाकर (भरपूर आनंद लेकर)।
19. कविता की पंक्तियों में किसे सीख दी गई है?
उत्तर: युधिष्ठिर को।
20. मृत्यु किसका पीछा करती है?
उत्तर: जो मौत से डरता है।
21. काँटों का झुरमुट क्या संकेत देता है?
उत्तर: जीवन की बाधाएँ।
22. लेखक ने ‘पंखों के नीचे छिपने’ को क्या कहा है?
उत्तर: कायरता या सड़ने वाला जीवन।
23. साहसी मनुष्य दुनिया के लिए क्या होता है?
उत्तर: एक उदाहरण या प्रकाश-स्तंभ।
24. किसे ‘क्रीतदास’ नहीं बनना चाहिए?
उत्तर: एक विजेता या साहसी व्यक्ति को।
25. कायर मनुष्य को आत्मा क्या कहकर धिक्कारती है?
उत्तर: “तुम कायर हो”।
26. सागर में गहराई तक कौन उतरता है?
उत्तर: साहसी साधक।
27. साहसी व्यक्ति किस पर पंजा डालता है?
उत्तर: अपनी जीत पर।
28. संकट के समय व्यक्ति को क्या नहीं खोना चाहिए?
उत्तर: धैर्य और हिम्मत।
29. जीवन के साधकों को क्या चुनौती दी गई है?
उत्तर: गहराई में उतरने की।
30. ‘अमृत’ का स्वाद किसे मिलता है?
उत्तर: जिसने कड़वाहट (विष) सही हो।
31. साहसी व्यक्ति का समय कैसे बीतता है?
उत्तर: संघर्षों और नए अनुभवों के साथ।
32. अर्नल्ड बेनेट किस देश के साहित्यकार थे?
उत्तर: इंग्लैंड।
33. युधिष्ठिर को किसके पास जाने से मना किया गया है?
उत्तर: कायरता या गुलामी के पास।
34. पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: “साहस ही जीवन है”।
Note: If you find any mistakes in these questions and answers, you can tell us or correct it yourself.
जुदि नोंथाङा बेफोर सोंथिफोर आरो फिननायाव माबा गोरोन्थि मोनो, अब्ला नोंथाङा जोंनो खोन्थानो हागोन एबा गावनो बेखौ सुद्रायनो हागोन।
Class 9 Other Subjects: थाखो 9 नि गुबुन आयदाफोर
Hindi :
FAQs:
1. Where can I get Class 9 Hindi Chapter 1 Question Answer हिम्मत और जिंदगी?
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2. Is this lesson included in the ASSEB/SEBA Class 9 Hindi syllabus?
Yes, the Class 9 Hindi syllabus and is prescribed by the ASSEB/SEBA.
3. Is the “Class 9 Hindi Chapter 1 Question Answer हिम्मत और जिंदगी“ lesson important for exam preparation?
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