Class 9 Hindi Chapter 2 Question Answer परीक्षा
पाठ-2
परीक्षा
(आनजाद)
यह अध्याय महान कथाकार प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली और संदेशपरक कहानी है, जो सच्ची मानवीयता और चरित्र की परख पर केंद्रित है। कहानी देवगढ़ रियासत के अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह के सेवामुक्त होने की इच्छा से आरंभ होती है, जिस पर राजा साहब यह शर्त रखते हैं कि उन्हें स्वयं अपने उत्तराधिकारी की खोज करनी होगी। सुजानसिंह एक ऐसी अनूठी परीक्षा का आयोजन करते हैं जिसमें किताबी डिग्रियों से अधिक व्यक्ति के परोपकार, साहस और आत्मबल को महत्व दिया जाता है। विज्ञापन के आकर्षण में देश भर से सैकड़ों उम्मीदवार देवगढ़ पहुँचते हैं और ऊँचा पद पाने के लोभ में अपने वास्तविक स्वभाव को छिपाकर धर्म-निष्ठा और सदाचार का झूठा नाटक करने लगते हैं। कोई सुबह जल्दी उठकर प्रकृति प्रेम दिखाता है, तो कोई नास्तिक होते हुए भी मंदिर के पुजारी जैसा अभिनय करता है, परंतु अनुभवी सुजानसिंह एक ‘जौहरी’ की भाँति इन ‘बगुलों’ के बीच छिपे असली ‘हंस’ की तलाश में रहते हैं।
कहानी का निर्णायक मोड़ तब आता है जब एक शाम हॉकी के खेल के बाद सभी उम्मीदवार थककर लौट रहे होते हैं। रास्ते में एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी कीचड़ में फँसी होती है, जिसे देखकर अधिकांश अहंकारी उम्मीदवार अनदेखा कर देते हैं। परंतु पंडित जानकीनाथ नामक एक युवक, जो स्वयं चोटिल था, अपनी पीड़ा की परवाह किए बिना कीचड़ में उतरता है और अपनी पूरी शक्ति से उस गरीब किसान की मदद करता है। वह किसान वास्तव में स्वयं सुजानसिंह थे, जो वेष बदलकर उम्मीदवारों की परीक्षा ले रहे थे। अंततः सुजानसिंह जानकीनाथ को नया दीवान चुनते हैं क्योंकि उन्होंने सिद्ध कर दिया था कि उनके हृदय में गरीबों के प्रति दया और संकट में वीरता दिखाने का साहस है। प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से यह महान संदेश देते हैं कि पद और प्रतिष्ठा से कहीं अधिक मूल्यवान मनुष्य की संवेदनशीलता और उसकी अंतरात्मा होती है।
अभ्यास-माला (सोलोंनायनि फारि)
बोध एवं विचार
1. पूर्ण वाक्य में दो :
(क) ‘परीक्षा’ कहानी में किस पद के लिए परीक्षा ली गई है?
(‘परीक्षा’ सल’आव बबे मासिनि थाखाय आनजाद लानाय जादों?)
उत्तर: ‘परीक्षा’ कहानी में रियासत देवगढ़ के दीवान पद के लिए परीक्षा ली गई है।
(ख) दीवान साहब के समक्ष क्या शर्त रखी गई?
(दीवान साहाब नि थाखाय मा रादाय दोननाय जादोंमोन?)
उत्तर: राजा साहब ने दीवान सुजानसिंह के सामने यह शर्त रखी कि रियासत के लिए नया दीवान उन्हें स्वयं ही खोजना पड़ेगा।
(ग) ‘परीक्षा’ कहानी में उम्मीदवार कौन-सा सामूहिक खेल खेलते हैं?
(‘परीक्षा’ सल’आव बिजाथिफोरा माबे हानजानि खेलाखौ गेलेयो?)
उत्तर: ‘परीक्षा’ कहानी में उम्मीदवार हॉकी का सामूहिक खेल खेलते हैं।
(घ) दीवान के पद के लिए किसका चयन किया गया?
(दीवाननि मासिनि थाखाय सोरखौ सायख’नाय जादोंमोन?)
उत्तर: दीवान के पद के लिए पंडित जानकीनाथ का चयन किया गया।
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) दीवान सुजानसिंह ने महाराज से क्या प्रार्थना की? क्यों?
(दीवान सुजानसिंहआ महाराजानियाव मा आरज गाबदोंमोन? मानो?)
उत्तर: दीवान सुजानसिंह अब बूढ़े हो गए थे और उनमें राजकाज सँभालने की शक्ति नहीं रही थी। उन्होंने महाराज से प्रार्थना की कि उन्हें सेवामुक्त कर दिया जाए ताकि बुढ़ापे में उनके चालीस साल की नेकनामी पर कोई दाग न लगे।
(ख) उम्मीदवार विभिन्न प्रकार के अभिनय कैसे और क्यों कर रहे थे?
(बिजाथिफोरा माबोरै आरो मानो बायदि रोखोमनि फाव दिन्थिदोंमोन?)
उत्तर: उम्मीदवार दीवान पद पाने के लिए अपनी बुराइयों को छिपाकर सदाचार और धर्मनिष्ठा का ढोंग (अभिनय) कर रहे थे। कोई सुबह जल्दी उठकर मंदिर जाता, तो कोई किताबों में डूबा रहता, ताकि सुजानसिंह की नजरों में वे नेक इंसान बन सकें।
Or
दीवान पद पाने के लिए उम्मीदवार अपनी असलियत छिपाकर नेक होने का अभिनय कर रहे थे। जो देर से सोकर उठते थे वे सुबह जल्दी घूमने लगे, और जिन्हें हुक्का पीने की लत थी वे अंधेरे में छिपकर सिगरेट पीने लगे। जो नौकरों को सताते थे वे अब ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर बात करने लगे। नास्तिक लोग धर्म-निष्ठ बन गए और जिन्हें किताबों से नफरत थी वे दिन-भर धर्म-ग्रंथ पढ़ने का ढोंग करने लगे।
उम्मीदवारों ने अपने स्वभाव के विपरीत यह दिखावा इसलिए किया ताकि वे सुजानसिंह को प्रभावित करके दीवान का ऊँचा पद हासिल कर सकें।
(ग) एक उम्मीदवार ने गाड़ीवाले की मदद कैसे की ?
(सासे बिजाथिया गारि बिगोमाखौ माबोरै मदद खालामखो?)
उत्तर: हॉकी के खेल के बाद एक घायल उम्मीदवार ने देखा कि एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी नाले के कीचड़ में फंसी है। उसने अपनी चोट की परवाह न करते हुए कीचड़ में उतरकर कंधा लगाया और गाड़ी को ऊपर चढ़ा दिया।
Or
हॉकी का खेल खत्म होने के बाद जब सभी उम्मीदवार लौट रहे थे, तब एक उम्मीदवार ने देखा कि एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी नाले के कीचड़ में फंसी हुई है। वह युवक खुद घायल था, फिर भी उसने किसान के पास जाकर मदद की पेशकश की। उसने अपने कोट उतारकर किनारे रखे और कीचड़ में उतरकर गाड़ी के पहियों को पूरी ताकत से धकेला, जिससे गाड़ी नाले के ऊपर आ गई। इस प्रकार उस युवक ने अपनी चोट की परवाह किए बिना निस्वार्थ भाव से गाड़ीवाले की मदद की।
(घ) किसान ने अपने मददगार युवक से क्या कहा? उसका क्या अर्थ था?
(आबादारिया गावनि हेफाजाबगिरि सेंग्राखौ मा बुंदोंमोन? बेनि ओंथिया मामोन?)
उत्तर: किसान ने युवक से कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” इसका अर्थ यह था कि युवक का परोपकारी और साहसी स्वभाव उसे इस उच्च पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाता है।
Or
किसान ने अपने मददगार युवक से मुस्कुराकर कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” इसका अर्थ यह था कि युवक के हृदय में जो दया, साहस और परोपकार की भावना थी, वही उसे दीवान के उच्च पद के लिए सबसे योग्य बनाती थी। किसान (जो वास्तव में वेश बदलकर सुजानसिंह ही थे) जान गए थे कि एक सच्चा इंसान वही है जो अपनी चोट या पद की चिंता किए बिना दूसरों की मदद करे, और ऐसा व्यक्ति ही राज्य चलाने के लायक है।
(ङ) सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा कैसे ली?
( सुजनसिंहआ बिजाथिफोरनि आनजादखौ माबोरै लादोंमोन?)
उत्तर: सुजानसिंह ने एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार का गुप्त रूप से निरीक्षण किया। अंत में उन्होंने स्वयं किसान बनकर अपनी गाड़ी कीचड़ में फँसा दी ताकि वे उम्मीदवारों के दया और साहस की परीक्षा ले सकें।
Or
सरदार सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा लेने के लिए एक अनूठी योजना बनाई। उन्होंने एक महीने तक सभी उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार का गुप्त रूप से निरीक्षण किया। अंत में, उन्होंने खुद एक गरीब किसान का वेश धारण किया और अपनी अनाज से भरी गाड़ी को जानबूझकर नाले के कीचड़ में फँसा दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि वे देख सकें कि ऊँचे पद के लालची उम्मीदवारों में से किसके हृदय में गरीबों के प्रति सच्ची दया, साहस और परोपकार की भावना है।
(च) पं० जानकीनाथ में कौन-कौन से गुण थे?
(पन्डित जानकिनाथहा मा मा गुनफोर दंमोन?)
उत्तर: पं० जानकीनाथ में साहस, आत्मबल और सबसे बढ़कर उदारता का गुण था। वे एक दयालु हृदय वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी चोट और पद की चिंता किए बिना एक गरीब किसान की निस्वार्थ भाव से मदद की।
(छ) सुजानसिंह के मतानुसार दीवान में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
(सुजनसिंहनि बादिब्ला सासे मन्थ्रियाव मा मा गुन थानांगौ?)
उत्तर: सुजानसिंह के अनुसार दीवान ऐसा होना चाहिए जिसके हृदय में दया हो, आत्मबल हो और जो आपत्ति का वीरता से सामना कर सके। ऐसा व्यक्ति कभी गरीबों को नहीं सताएगा और धर्म के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटेगा।
3. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में):
(फरानि हेफाजाबाव बेखेव(100 सोदोबाव))
(क) लेकिन, मनुष्य का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था कि इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा है।
उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई है। यहाँ ‘बूढ़ा जौहरी’ सरदार सुजानसिंह को कहा गया है।
व्याख्या: सुजानसिंह एक अनुभवी व्यक्ति थे। जैसे एक जौहरी असली हीरे की पहचान कर लेता है, वैसे ही सुजानसिंह उम्मीदवारों के बाहरी दिखावे (बगुले के समान सफेद और शांत व्यवहार) के पीछे छिपे उनके असली चरित्र को परख रहे थे। सभी उम्मीदवार दीवान बनने के लिए नेक होने का नाटक कर रहे थे, लेकिन सुजानसिंह यह देख रहे थे कि इनमें से वह ‘हंस’ कौन है जिसके हृदय में सच्ची दया और साहस है। अंततः उन्हें वह ‘हंस’ पंडित जानकीनाथ के रूप में मिल गया।
(ख) गहरे पानी में बैठने से मोती मिलता है।
उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई है। यह पंक्ति उस समय की है जब सुजानसिंह किसान के रूप में मदद करने वाले युवक (जानकीनाथ) को देखते हैं और मुस्कुराकर यह बात कहते हैं।
व्याख्या: इस कहावत का अर्थ है कि सफलता और मूल्यवान वस्तुएं (मोती) पाने के लिए कठिन परिश्रम और जोखिम उठाना पड़ता है। जैसे कीमती मोती समुद्र की गहराई में जाने पर ही मिलता है, वैसे ही जानकीनाथ ने कीचड़ और नाले के ‘गहरे पानी’ में उतरने का साहस दिखाया, तभी उन्हें दीवान पद जैसा ‘मोती’ प्राप्त हुआ। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि सच्चा सम्मान और पद केवल डिग्री से नहीं, बल्कि कठिन परीक्षा और निस्वार्थ कर्मों से मिलता है।
(ग) उन आँखों में सत्कार था और इन आँखों में ईर्ष्या।
उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई है। यह पंक्ति कहानी के अंत की है, जब पंडित जानकीनाथ को नया दीवान घोषित किया जाता है।
व्याख्या: जब जानकीनाथ के नाम की घोषणा हुई, तो वहाँ मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग थीं। रियासत के कर्मचारियों और जनता की आँखों में जानकीनाथ के प्रति सत्कार (आदर और सम्मान) था क्योंकि उन्होंने उनकी योग्यता देख ली थी। इसके विपरीत, जो अन्य उम्मीदवार असफल हो गए थे, उनकी आँखों में जानकीनाथ के लिए ईर्ष्या (जलन) थी। वे खुद को श्रेष्ठ समझ रहे थे, पर हार जाने के कारण वे जानकीनाथ की सफलता को पचा नहीं पा रहे थे।
4. किसने किससे कहा, लिखो :
(क) कहीं भूल-चूक हो जाए तो बुढ़ापे में दाग लगे, सारी जिंदगी की नेकनामी मिट्टी में में मिल जाए।
उत्तर: दीवान सुजानसिंह ने महाराज (देवगढ़ के राजा) से कहा।
(ख) मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी देर से फँसे हुए हो।
उत्तर: युवक (पं० जानकीनाथ) ने किसान (गाड़ीवाले) से कहा।
(ग) नारायण चाहेंगे तो दिवानी आपको ही मिलेगी।
उत्तर: किसान ने युवक (पं० जानकीनाथ) से कहा ।
भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
(राव आरो रावखान्थिनि गियान)
1. नीचे लिखी संज्ञाओं में जातिवाचक, व्यक्तिवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ पहचानो :
(गाहायावनि लिरनाय सोदोबफोराव फोलेर दिन्थिग्रा, मुं दिन्थिग्रा आरो गुन दिन्थिग्रा सोदोबफोरखौ सिनाय :
देवगढ़, शक्ति, दीवान, जानकीनाथ, सादगी, अंगरखे, हंस, पुल, दया शिखर, नारायण, खिलाड़ी
उत्तर:
जातिवाचक संज्ञा : दीवान, अंगरखे, हंस, पुल, शिखर , खिलाड़ी
व्यक्तिवाचक संज्ञा : देवगढ़, जानकीनाथ, नारायण
भाववाचक संज्ञा : शक्ति , सादगी, दया
2. ‘अनुभवशील’ शब्द में ‘अनुभव’ तथा ‘शील’ शब्दों का योग है। इसका अर्थ है अनुभवी। ‘शील’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाओ।
(‘अनुभवशील’ सोदोबाव ‘अनुभव’ आरो ‘शील’ सोदोबफोरनि जथाय। बेनि ओंथिया जादों ‘रोंगौथि गोनां’। ‘शील’ उनदाजाबदेरना मोनबा सोदोब बानाय।)
उत्तर:
दया + शील = दयाशील
कर्म + शील = कर्मशील
विनय + शील = विनयशील
साहस + शील = साहसशील
उदार + शील = उदारशील
3. निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तित करो :
(ब्रैकेटआव होनाय खारिथि बादियै गाहायाव होनाय बाथ्राफोरखौ सोलाय)
(क) खिलाड़ी लोग बैठे दम ले रहे थे। (सामान्य वर्तमान-गोरलै दा बिदिन्था)
उत्तर: खिलाड़ी लोग बैठे दम लेते हैं।
(ख) लंबा आदमी सामने खड़ा है। (पूर्ण भूतकाल-जाखां बिदिन्था)
उत्तर: लंबा आदमी सामने खड़ा था।
(ग) ऐसे गुणवाले संसार में कम होते हैं। (सामान्य भविष्य- गोरलै इयुन बिदिन्था)
उत्तर: ऐसे गुणवाले संसार में कम होंगे।
4. दो शब्दों में यदि पहले शब्द के अंत में ‘अ’,’आ’ हो और बाद के शब्द के आरंभ में ‘इ’, ‘ई’ या ‘उ’, ‘ऊ’ हो तो उन दोनों में संधि होने पर क्रमशः
‘ए’, अथवा ‘औ’ हो जाता है; जैसे- देव+इंद्र =देवेंद्र, महा+ईश =महेश,
मंत्र+उच्चारण=मंत्रोच्चारण, पर+उपकार=परोपकार।
नीचे लिखे शब्दों में संधि करो –
(गाहायाव होनाय सोदोबफोरखौ ज’ खालाम-)
प्रश्न +उत्तर, गण+ईश, वीर+इंद्र, सूर्य+उदय, यथा+इच्छा
उत्तर:
प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
गण + ईश = गणेश
वीर + इंद्र = वीरेंद्र
सूर्य + उदय = सूर्योदय
यथा + इच्छा = यथेच्छा
5. विलोम शब्द लिखो :
(उल्था सोदोबखौ लिर)
सज्जन, उपस्थित, उपयुक्त, अपकार
उत्तर: सज्जन — दुर्जन
उपस्थित — अनुपस्थित
उपयुक्त — अनुपयुक्त
अपकार — उपकार
Note: If you find any mistakes in these questions and answers, you can tell us or correct it yourself.
जुदि नोंथाङा बेफोर सोंथिफोर आरो फिननायाव माबा गोरोन्थि मोनो, अब्ला नोंथाङा जोंनो खोन्थानो हागोन एबा गावनो बेखौ सुद्रायनो हागोन।
Class 9 Other Subjects: थाखो 9 नि गुबुन आयदाफोर
Hindi :
FAQs:
1. Where can I get Class 9 Hindi Chapter 2 Question Answer परीक्षा?
You can get complete Class 9 Hindi Chapter 2 Question Answer परीक्षा on Bodoland Library .
2. Is this lesson included in the ASSEB/SEBA Class 9 Hindi syllabus?
Yes, the Class 9 Hindi syllabus and is prescribed by the ASSEB/SEBA.
3. Is the “Class 9 Hindi Chapter 2 Question Answer परीक्षा“ lesson important for exam preparation?
Yes, questions from this lesson are commonly asked in ASSEB/SEBA Class 9 Hindi exams, including short answers, long answers, and vocabulary-based questions.