Class 6 Hindi Lesson 12 Question and Answer
पाठ-12
अभ्यास की महिमा
1. ‘अभ्यास की महिमा’ कहानी को पढ़ो, समझो और अपने ढंग से सुनाओ।
उत्तर: यह कहानी बोपदेव नाम के एक बालक की है। बोपदेव पढ़ने-लिखने में बहुत कमजोर था। उसके साथी उसे चिढ़ाते थे। गुरुजी ने उसे समझाया कि परिश्रम के बिना जीवन में सफलता नहीं मिल सकती। निराश होकर बोपदेव घर लौट रहा था। रास्ते में उसने कुएँ की जगत पर गड्ढे देखे। औरतों ने बताया कि बार-बार घड़ा रखने से पत्थर पर गड्ढे बन गए हैं। इससे बोपदेव को अभ्यास का महत्त्व समझ में आया। वह पाठशाला लौट गया और मन लगाकर पढ़ने लगा। बड़ा होकर वह संस्कृत का प्रसिद्ध विद्वान बना।
2. उत्तर दो :
(क) बोपदेव कैसा बालक था?
उत्तर: बोपदेव एक मंदबुद्धि और पढ़ने-लिखने में बहुत कमजोर बालक था।
(ख) बोपदेव के सहपाठी उसे क्या कहकर चिढ़ाते थे?
उत्तर: बोपदेव के सहपाठी उसे ‘बुद्ध’ या ‘मूर्ख’ कहकर चिढ़ाते थे।
(ग) गुरुजी ने बोपदेव को कहाँ भेजने का निश्चय किया?
उत्तर: गुरुजी ने बोपदेव को उसके गाँव भेजने का निश्चय किया।
3. कहानी को पढ़कर उत्तर लिखो :
(क) औरतें कुएँ पर क्या कर रही थीं?
उत्तर: औरतें कुएँ से पानी भर रही थीं।
(ख) कुएँ की जगत पर गड्डे कैसे बने थे?
उत्तर: बार-बार मिट्टी के घड़े रखने से गड्ढे बन गए थे।
(ग) बोपदेव पाठशाला क्यों लौट आया?
उत्तर: कुएँ पर गड्ढों को देखकर बोपदेव को अभ्यास की महिमा समझ में आ गई और उसने मन लगाकर पढ़ने का निश्चय किया, इसलिए वह पाठशाला लौट आया।
(घ) बोपदेव बड़ा होकर क्या बना?
उत्तर: बोपदेव बड़ा होकर संस्कृत का एक प्रसिद्ध विद्वान बना।
4. ‘अभ्यास की महिमा’ कहानी तुम्हें कैसी लगी? इससे तुम्हें कौन-सी सीख मिली?
उत्तर: यह कहानी अत्यंत प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद लगी। इससे हमें यह सीख मिलती है कि निरंतर अभ्यास और कड़ी मेहनत से कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
5. इसी तरह की कोई अन्य कहानी पढ़ो और उसे संक्षेप में अपने साथियों को सुनाओ।
6. लिखो:
उत्तर:
(क) ‘ये गड्ढे किसने बनाए हैं?’
किसने कहा?: बोपदेव ने।
किससे कहा?: कुएँ पर पानी भर रही औरतों से।
(ख) ‘ये गड्ढे हमने नहीं बनाए हैं?’
किसने कहा?: एक औरत ने।
किससे कहा?: बोपदेव से।
7. आओ पढ़ें, दोहराएँ और लिखें:
उत्तर:
(क) द् + य = (द्य) – विद्या, गद्य, पद्य, विद्यापति
द् + ध = (द्ध) – बुद्धि, बुद्धू, शुद्ध, प्रसिद्ध
द् + व = (द्व) – विद्वान, द्वेष, द्वार, द्वितीय
(ख) क्षमा = क् + ष् + अ + म् + आ
कक्षा = क् + अ + क् + ष् + आ
मित्र = म् + इ + त् + र् + अ
पत्र = प् + अ + त् + र् + अ
ज्ञान = ज् + ञ् + आ + न् + अ
यज्ञ = य् + अ + ज् + ञ् + अ
परिश्रम = प् + अ + र् + इ + श् + र् + अ + म् + अ
विश्राम = व् + इ + श् + र् + आ + म् + अ
8. पढ़ो, समझो और लिखो:
उत्तर:
अरजन = अर्जन
मूरख = मूर्ख
मरम = मर्म
धरम = धर्म
करम = कर्म
शरम = शर्म
9. जिन शब्दों का अर्थ प्रायः एक-सा होता है, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं। इन्हें समानार्थी शब्द भी कहा जाता है। जैसे- हवा, पवन, समीर आदि।
नीचे दिए गए शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो :
उत्तर:
बालक = लड़का, बच्चा
औरत = स्त्री, महिला
गुरु = शिक्षक, अध्यापक
घड़ा= मटका, कलश
पानी = जल, नीर
प्रसिद्ध = विख्यात, मशहूर
10. पाठ में आए पाँच संज्ञा शब्द चुनो और उनसे वाक्य बनाओ।
उत्तर:
बोपदेव: बोपदेव संस्कृत का महान विद्वान बना।
पाठशाला: बच्चे रोज़ पाठशाला जाते हैं।
कुआँ: कुएँ के पास औरतें खड़ी थीं।
गुरुजी: गुरुजी हमें पढ़ाते हैं।
पत्थर: कुएँ की जगत पत्थर की बनी थी।
11. अपने शिक्षक की मदद से इस दोहे का अर्थ समझो :
करत करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान
रसरि आवत जात ते, सिल पर पड़त निशान।
अर्थ: जिस प्रकार कुएँ की मुंडेर पर कोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने (घिसने) से कठोर पत्थर (सिल) पर भी निशान बन जाते हैं, ठीक उसी प्रकार निरंतर अभ्यास करने से मूर्ख (जड़मति) व्यक्ति भी ज्ञानी और बुद्धिमान (सुजान) बन जाता है।
12. सुलेख लिखो:
परिश्रम के बिना जीवन में कोई भी सफल नहीं हो सकता।
उत्तर:
परिश्रम सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति मेहनत और लगन से काम करता है, वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हमें कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। लगातार अभ्यास और परिश्रम करते रहना चाहिए। परिश्रम करने वाला व्यक्ति जीवन में अवश्य सफल होता है।
13. आओ, इन वाक्यों को समझें:
मैं पढ़ता हूँ। तू पढ़ता है। तुम पढ़ते हो।
वह खेलता है। राजू पढ़ता है। हम पढ़ते हैं।
आप जानते हैं। सोनिया और मनोज खेलते हैं।
अब खाली जगह भरो :
मैं छात्र हूँ। मैं छात्रा हूँ।
तू लिखता है। तुम लिखते हो।
तुम कलाकार हो। तुम महान हो।
हम विद्यार्थी हैं। हम साथ-साथ पढ़ते हैं।
आप शिक्षक हैं। मदन और करीम दोस्त हैं।
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जुदि नोंथाङा बेफोर सोंथिफोर आरो फिननायाव माबा गोरोन्थि मोनो, अब्ला नोंथाङा जोंनो खोन्थानो हागोन एबा गावनो बेखौ सुद्रायनो हागोन।